माँ की तरह


अब मैं जागना
चाहती हूँ
पर ना जाने क्यों ?
मेरी असीमित नींद
पल पल मेरा
पीछा कर रही है
जैसे कुछ छुपाना
चाहती है मुझसे
अब मैं पूरी
रात जागकर
सुनना चाहती हूँ
रात की सिसकियों
को और अपनी
कृत्रिम रोशनी
से उसके अंधेरे को
बाटंना चाहती हूँ
पर हर बार
वह मुझे
सुला कर
अकेले ही
अपने अँधेरे में
जूझ रही है
बिल्कुल माँ की तरह ।

नीलम नवीन "नील"

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